राजस्थान की झीलें (Lakes of Rajasthan )

 राजस्थान की झीलें (Lakes of Rajasthan )

● खारे पानी की झीलें
सर्वाधिक- नागौर
राजस्थान की नमक मंडी:-
नावा (नागौर)

● मीठे पानी की झीले
सर्वाधिक- उदयपुर
झीलों की नगरी, लैक सिटी

– राजपूताने में सर्वाधिक जल संरक्षण के लिए कार्य मेवाड़ रियासत को के द्वारा किया गया।
– अरावली पर्वतमाला के पश्चिम की ओर अधिकांशत खारे पानी की झीले हैं जबकि पूर्व की ओर अधिकांशतः मीठे पानी की झीले पाई जाती है।

● “खारे पानी की झीले”:

1. सांभर झील: नागौर, जयपुर, अजमेर
– लंबाई- 32 किलोमीटर, चौड़ाई 3 – 12 किलोमीटर
– आकृति- आयताकार
– कुल क्षेत्रफल- 145 वर्ग किलोमीटर
– सांभर झील प्राकृतिक झील है परंतु बिजौलिया शिलालेख के अनुसार इस झील का निर्माण वासुदेव चौहान के द्वारा करवाया गया हैं।
– सांभर झील देश की नमक उत्पादन के आधार पर देश की सबसे बड़ी स्थल बद्ध खारे पानी की झील है।

Note:-

  • देश की सबसे बड़ी खारे पानी की झील चिल्का झील है जो उड़ीसा में स्थित है (लैगून झील)
  • सांभर झील में देश के कुल नमक उत्पादन का 8.7% उत्पादित होता है। इस झील के नमक को ही क्यार नमक, रेश्ता नमक आदि नामों से जाना जाता है।
  • 1964 में स्थापित हिंदुस्तान सांभर साल्ट लिमिटेड यहाँ नमक उत्पादन का कार्य कर रही है।
  • सांभर झील में रूपाईरुलीना नामक शैवाल पाया जाता है।
  • यहां पर 1870 में अंग्रेजों द्वारा स्थापित एकमात्र साल्ट म्यूजियम स्थित है।
  • सांभर में खारेपन के कारण टेथिस महासागर के अवशेष, धरातल में विद्यमान लवणीय चट्टाने, खारी नदियों का जल, दक्षिण – पश्चिमी हवाओं का योगदान आदि।
  • सांभर झील रामसर साइट के रूप में घोषित है।
  • सांभर से संबंधित ऐतिहासिक तथ्य- राजा ययाति की साम्राज्यस्थली, शाकम्बरी माता का मंदिर, अकबर की विवाह स्थली, नालीसर
  • सभ्यता, नालीसर मस्जिद आदि।

2. पंचभद्रा / पंचपद्रा झील:-

  • बालोतरा (बाड़मेर)
  • अपवाह क्षेत्र-25 किलोमीटर
  • इस झील का नमक सर्वश्रेष्ठ है। यहां पर 98% Nacl की मात्रा पाई जाती है।
  • यहां पर राजस्थान सरकार का राजकीय लवण स्रोत केंद्र स्थित है।
  • इस भू-भाग पर लगभग 400 – 500 वर्ष पहले पंचाभील ने एक खेडा / पुरवा बसाया था।
  • इसी भील के नाम पर इसका नाम पंचपद्रा पड़ा।
  • यहां पर खारवेल जाति के लोग मोरली झाड़ी की सहायता से वायु प्रवाह पद्धति के द्वारा नमक उत्पादित करते हैं।
  • इस झील से प्राप्त नमक को कोशिया नमक कहते हैं।
  • पंचपद्रा के क्षेत्रों में छोटे-छोटे कूसे बनाकर भी नमक उत्पादन का कार्य भी किया जाता है।
  • 1960 में राज्य सरकार ने यहां स्टेट साल्ट वर्क्स लिमिटेड की स्थापना की जो यहां नमक उत्पादन का कार्य कर रही है।

3. “डीडवाना झील”:- नागौर

  • लंबाई :- 4 किलोमीटर
  • चौड़ाई:- 3-6 किलोमीटर
  • विस्तार:-10 वर्ग किलोमीटर
  • इस झील का नमक खाने योग्य नहीं है क्योंकि यहां पर Nacl की तुलना में Na2So4 अधिक मात्रा में पाया जाता है।
  • राज्य सरकार ने 1960 में यहां पर स्टेट केमिकल वर्क्स के नाम से दो कारखाने स्थापित किये। जिनमें Na2So4 का उत्पादन होता है।
  • यहां से प्राप्त नमक को ब्राइन नमक कहा जाता है। तथा इस झील का संबंध रासायनिक उद्योग से हैं।

4. “लूणकरणसर झील”:- बीकानेर

  • यह झील NH- 15 के समीप स्थित है।
  • वर्तमान में इस झील में अल्प मात्रा में ही नमक का उत्पादन होता है जिससे केवल स्थानीय आपूर्ति हो सकती है।
  • सामान्यतय लूणकरणसर राजस्थान में मूंगफली उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है अतः इसे राजस्थान का राजकोट कहा जाता है।

Note:- राजकोट गुजरात में स्थित है जो संपूर्ण देश में मूंगफली उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है।

5. “तालछापर / छपरताल झील”:- सुजानगढ़ (चूरु)
– इस झील के आस पास काले हिरण देखे जा सकते हैं।

रैवासा :- सीकर
– प्राचीन समय में संपूर्ण एशिया में यह झील नमक उत्पादन के लिए प्रसिद्ध थी।
कर्नल जेम्स टॉड ने अपनी पुस्तक एनल्स एंड एंटीक्विटीज ऑफ राजस्थान में झील का उल्लेख किया है।

– फलोदी झील, बाप झील:- जोधपुर
– डेगाना झील,कुचामन झील, नावां झील:- नागौर
– थोब झील:– बाड़मेर
– कावोध झील, पोकरण, बरमसर, भाकरी, कनौड:- जैसलमेर।

● मीठे पानी की झीले:-

1. जयसमंद झील / ढेबर झील:- उदयपुर

  • लंबाई:- 15 किलोमीटर, चौड़ाई:- 2 – 8 किलोमीटर
  • क्षेत्रफल :- सामान्यतः 55 वर्ग किलोमीटर
  • जयसमंद झील एशिया की दूसरी सबसे बड़ी व राजस्थान की पहली कृत्रिम मीठे पानी की झील है।
  • इस झील का निर्माण मेवाड़ महाराणा जय सिंह ने 1685 – 1691 के मध्य गोमती नदी, झामरी आदि नदियों के जल को ढेबर नामक स्थान पर रोककर करवाया अतः इसे ढेबर झील भी कहते हैं।
  • यह झील उदयपुर रियासत की शीतकालीन राजधानी हुआ करती थी।
  • इस झील में विभिन्न प्रकार के जलीय जीव पाए जाते हैं अतः इस झील को जलचरो की बस्ती कहा गया है।
  • इस झील में छोटे-बड़े सात टापू स्थित हैं जिन पर आदिवासी लोग निवास करते हैं।
  • सबसे बड़ा टापू का नाम- बाबा का भागड़ा, सबसे छोटे टप्पू का नाम- प्यारी है।
  • बाबा का भागड़ा पर आइसलैंड रिसोर्ट बना हुआ है।
  • 1950 में इस झील से सिंचाई हेतु श्यामपुरा व भाट नहर निकाली गई।
  • इन नहरों की कुल लंबाई 24 किलोमीटर है।
  • इस झील के क्षेत्रो पर चित्रित हवा महल, रूठी रानी का महल, छः ओदियाँ आदि दर्शनीय स्थल है।

2. “राजसमन्द / राजसमुंद्र झील”:- कांकरोली (राजसमंद)

  • एकमात्र झील जिसके नाम पर जिले का नामकरण है।
  • इस झील का निर्माण महाराणा राज सिंह ने गोमती नदी के जल को रोककर अकाल राहत परियोजना के अंतर्गत करवाया ।
  • इस झील में ताल व केलवा नदियों का भी जल आकर गिरता है।
  • लंबाई:- 6.5 किलोमीटर,
  • चौड़ाई :- 3 किलोमीटर
  • गहराई :- 25 फीट
  • इस झील की नीव घेवर बाई ने रखी थी तथा उसने यही पर अपने प्राणों का त्याग किया था।
  • घेवर माता का मंदिर इसी झील के किनारे स्थित है।
  • यह राजस्थान की ऐसी कृत्रिम झील है जिसमें यहां के लगभग 60,000 लोगों के द्वारा कार्य किया गया।
  • यहां पर स्थित कलात्मक आकृतियों को देखकर दिलवाड़ा के जैन मंदिरों की याद आती है।
  • राजसमंद झील का उत्तरी भाग नौ चौकी पाल कहलाता है तथा यहां पर ही एशिया की सबसे बड़ी प्रशस्ति राज प्रशस्ति स्थित है
  • राजप्रशस्ति 25 शिलालेखों पर 1917 संस्कृत श्लोकों में उत्कीर्ण है। इसेके प्रशस्तिकार रणछोड़ भट्ट तेलंग थे।
  • इस प्रशस्ति पर मेवाड़ का इतिहास बप्पा रावल से लेकर राजसिंह तक का उत्कीर्ण है।
  • इस झील के उत्तर पूर्व में दयाल सिंह द्वारा निर्मित जैन मंदिर स्थित है।

3. “स्वरूपसागर झील”:- उदयपुर

  • इस झील का निर्माण 1857 में मेवाड़ महाराणा स्वरूप सिंह के द्वारा करवाया गया।
  • यह झील फतेहसागर व पिछोला झील को आपस में जोड़ती हैं।

14. “आनासागर झील”:- अजमेर

  • इस झील का निर्माण अर्णोराज / आनाजी ने तुर्क सेना के नर संहार के पश्चात खूनी धरती को साफ करने के लिए लूणी / चन्दा नदी के जल को रोककर 1135 – 37 के मध्य करवाया था।
  • इस झील का दो मुगल बादशाहो जहांगीर व शाहजहां से अत्यधिक संबंध रहा है।
  • जहांगीर ने इस झील के किनारे दौलत बाग का निर्माण करवाया था जिसे वर्तमान में सुभाष उद्यान के नाम से जाना जाता है।
  • जहांगीर ने इस झील के किनारे ही चश्म – ए – नूर झरना बनवाया था।
  • अंग्रेज राजदूत सर टॉमस की जहांगीर से मुलाकात इसी झील के किनारे हुई थी।
  • नूरजहां की माता अस्मत बेगम ने ईत्र बनाने की विधि का आविष्कार इसी झील के किनारे किया था।
  • जहांगीर ने इस झील के किनारे महल बनवाया था जिसे नूरजहां महल / रूठी रानी महल के नाम से जाना जाता है।
  • शाहजहां ने इस झील के किनारे पांच बारह दरी का निर्माण करवाया था।

5. “उदयसागर झील”:- उदयपुर

  • इस झील का निर्माण मेवाड़ महाराणा उदय सिंह के द्वारा करवाया गया।
  • इस झील में आयड नदी अपना जल गिराती है। इस झील से आगे इस जल को बेड़च नदी के नाम से जाना जाता है।

6. “नंदसबंध झील”:- राजसमंद

  • इस झील को राजसमंद की जीवन रेखा कहा जाता है।

7. “गैव सागर झील”:- डूंगरपुर

  • इस झील का निर्माण गोपीनाथ के द्वारा करवाया गया तथा इससे एडवर्ड सागर बांध भी कहते हैं।
  • इस झील के मध्य में बादल महल स्थित है तथा इस झील के किनारे कालीबाई का स्मारक स्थित है।

8. “मोती झील”:- भरतपुर

  • महाराजा सूरजमल ने इस झील का निर्माण रूपारेल नदी के बाढ़ की समस्या को कम करने के लिए करवाया था।
  • मोती झील को भरतपुर की लाइफ लाइन कहा जाता है।

9. “पुष्कर झील”:- अजमेर

  • NH- 89 अजमेर
  • पुष्कर झील के उपनाम  –
  • अर्धचंद्राकार झील
  • 52 घाटा झील
  • तीर्थराज
  • तीर्थों का मामा
  • पांचवा तीर्थ
  • सबसे पवित्र
  • सबसे प्रदूषित झील आदि
  • भूगोलवेताओं के अनुसार पुष्कर झील ज्वालामुखीयों के द्वारा निर्मित कोलेडेरा झील है जबकि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस झील का निर्माण पुष्करणा ब्राह्मणों के द्वारा करवाया गया।
  • पुष्कर झील राजस्थान में मीठे पानी की सबसे बड़ी झील है।
  • 1997 – 98 में कनाडा के सहयोग से इस झील की सफाई की गई।
  • राष्ट्रीय झील संरक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत वर्तमान में यहाँ पर झील सुधार कार्यक्रम चल रहा है।
  • मण्डौर के शासक के नाहरराव ने यहां पर 52 घाटों का निर्माण करवाया था।
  • 1911 में ब्रिटिश सम्राट जॉर्ज पंचम व क्वीन मैरी भारत आए। इसी दौरान मैरी ने पुष्कर झील की यात्रा की तथा महिलाओं के लिए मैरी घाट / जनाना घाट का निर्माण करवाया ।
  • कालांतर में इसी घाट से महात्मा गांधी की अस्थियों का विसर्जन किया गया अतः गांधी घाट भी कहते हैं।
  • पुष्कर झील पर प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा को मेला भरता है। जो राजस्थान का सबसे रंगीन मेला है तथा इस मेले में सर्वाधिक विदेशी पर्यटक आते हैं तथा यह मेला ऊँटो की बिक्री के लिए प्रसिद्ध है
  • पुष्कर झील को मंदिरों / देवताओं की नगरी कहते हैं।
  • इस झील के किनारे ब्रह्मा मंदिर स्थित है जिसकी मूर्ति स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य के द्वारा की गई जिसका वर्तमान गोकुल चंद पारीक ने प्रदान किया।
  • इस झील के किनारे रत्नागिरी पहाड़ी पर सावित्री जी का मंदिर स्थित है
  • इस झील के किनारे ही वरहा मंदिर स्थित है जिसका निर्माण अर्णोराज के द्वारा करवाया गया।।परंतु जहांगीर ने इस प्रतिमा को पुष्कर में फिकवा दिया था।
  • इस झील के किनारे ही गायत्री मंदिर, रंगनाथ मंदिर स्थित हैं।
  • रंगनाथ मंदिर द्रविड़ शैली में बना हुआ है।
  • विश्वामित्र ने इस झील के किनारे तपस्या की जिसे इंद्र की अपसरा मेनका ने भंग किया था।

10. “कोलायत झील”:- बीकानेर, NH-15

  • इस झील को मरुस्थल का सुंदर उद्यान भी कहा जाता है।
  • इस झील पर 52 घाट बने हुए हैं। तथा यहां पर 12 शिवलिंगो वाला शिवालय स्थित है।
  • इस झील के किनारे ही सांख्य दर्शन के रचयिता कपिल मुनि का मंदिर, आश्रम स्थित है।
  • इस झील पर प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा को मेला भरता है। तथा इस मेले की में दीपदान की परंपरा है।
  • करणी माता का गोद लिया हुआ बच्चा कोलायत झील में डूब गया था अतः चारण जाति के लोग इस झील में स्नान नहीं करते हैं।

11. “कायलाना झील”:- जोधपुर

  • यह जोधपुर की सबसे बड़ी प्राकृतिक झील है।
  • 1872 में सर प्रताप सिंह के द्वारा इस झील का आधुनिकरण किया गया अतः इसे प्रतापसागर भी कहते हैं।
  • इस झील के किनारे माचिया सफारी पार्क स्थित है।
  • यह राजस्थान की एकमात्र झील है जिसमें इंदिरा गांधी नहर के द्वारा जल को डाला जाता है।

12. “सिलीसेढ़ झील”:- अलवर

  • क्षेत्रफल:- 10 वर्ग किलोमीटर
  • इस झील को राजस्थान का नंदनकानन कहते हैं।
  • इस झील के किनारे महाराज विनय सिंह ने अपनी रानी शीला के लिए छः मंजिला महल का करवाया था। जो वर्तमान में लेक पैलेस के रूप में प्रसिद्ध है।
  • यह झील मत्स्य पालन व नौका विहार के लिए प्रसिद्ध है।

13. “बालसम्बंध झील”:- जोधपुर

  • इस झील का निर्माण 1159 में प्रतिहार शासक बालकराव ने करवाया था।
  • वर्तमान में इस झील से पेयजल उपलब्ध करवाया जाता है।

14. “नक्की झील”:- माउंट आबू (सिरोही)

  • भूगोलवेताओ के अनुसार यह ज्वालामुखी के द्वारा निर्मित क्रेटर झील है।
  • परंतु पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस झील का निर्माण देवताओं ने नाखूनों से खोदकर किया।

Note:-

  • एक गाथा है कि रसिया बालम ने अपनी प्रेमिका के लिए इस झील को बनाया था।
  • नक्की झील ही राजस्थान की सर्वाधिक ऊंचाई पर स्थित झील हैं।
  • नक्की झील राजस्थान की सबसे गहरी झील हैं। (80 फीट)
  • नक्की झील राजस्थान की एकमात्र झील है जो सर्दियों के दिनों में जम जाती है अतः इस झील को गर्मियों का स्वर्ग कहते हैं।
  • ब्रिटिश काल में राजस्थान AGG का ग्रीष्मकालीन मुख्यालय यहीं पर होता था।
  • इस झील के किनारे राजस्थान का एकमात्र हिल स्टेशन है तथा यहीं पर सनसेट पॉइंट, हनीमून प्वाइंट स्थित है।
  • इस झील के किनारे विभिन्न दर्शनीय चट्टाने है-
  • टोड रॉक:- मेंढक की आकृति वाली चट्टान
  • नन्द रॉक:- बैल की आकृति वाली चट्टान
  • नन रॉक:- घूंघट निकाले स्त्री के समान प्रतीत होने वाली चट्टान
  • इस झील के किनारे हाथी गुफा, चंपा गुफा, रामेश्वरम मंदिर, रघुनाथ मंदिर आदि दर्शनीय स्थान है।

15. “फॉयसागर झील “:- अजमेर

  • इस झील का निर्माण 1891- 92 में अजमेर नगर परिषद के द्वारा अकाल राहत परियोजना के अंतर्गत इंजीनियर फॉय के निर्देशन में करवाया गया।
  • अतः इस झील का नाम इंजीनियर फॉय के नाम पर फॉयसागर पड़ा ।
  • इस झील की गहराई 26 फीट है।
  • इस झील के निर्माण में लगभग 2 लाख 69 हजार रुपए खर्च हुये।
  • फॉय सागर का जलस्तर बढ़ जाने पर इसका पानी आना सागर में आ जाता है।

16. “बिसलसर झील”:- अजमेर

  • यह कृत्रिम झील है जिसका निर्माण 1152 – 62 के मध्य बीसलदेव के द्वारा करवाया गया।

17. गढसीसर झील:- जैसलमेर
18. “प्रीतमपुरी झील”:- सीकर
19.”बुड्ढा जोहड़ झील”:- श्रीगंगानगर
20. “मानसरोवर झील”:- झालावाड़

“महत्वपूर्ण तथ्य”:-

  • राजस्थान की 8 झीलों को केंद्र सरकार ने केंद्रीय झील संरक्षण योजना में शामिल किया है – पुष्कर, आनासागर, अजीत सागर, फतेहसागर, पिछोला, जयसमंद, स्वरूप सागर, नक्की झील।
  • राजस्थान के उदयपुर जिले में सर्वाधिक नदियों का उदगम होता है। जबकि सर्वाधिक नदियां चित्तौड़गढ़ जिले में बहती हैं।
  • संभागों में सर्वाधिक नदियों वाला संभाग कोटा है। जबकि बीकानेर व चूरू ऐसे जिले हैं जिनमें कोई नदियां नहीं बहती है।
  • राजस्थान में भूजल का सर्वाधिक उपयोग कृषि क्षेत्र में होता है।
  • राजस्थान में 30 जिले ऐसे हैं जहां फ्लोराइड की मात्रा 1.5 ml से अधिक है।
  • जमीन में पानी का स्तर सामान्य मापदंड से नीचे चला जाना डार्क जोन कहलाता है।
  • आंकड़ों के अनुसार प्रतिवर्ष भूजल 2 मीटर नीचे की ओर जा रहा है।
  • नागौर जिले में कूबड़ पट्टी फ्लोराइड की अधिक मात्रा के लिए प्रसिद्ध है।
  • जिसमें स्थानीय नागरिकों को विभिन्न बीमारियां होती होती है।

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